Psalms 66 – He Turned the Sea into Dry Land

All the earth is called to praise the God who parted the sea.

Psalms 66: Make a Joyful Noise Unto God

This entry in the Psalms overview opens as a summons to every nation to make a joyful noise to God, recalling how He turned the sea into dry land so His people crossed on foot. It follows the harvest praise of Psalms 65 with a broader call to worship.


हे सारी पृथ्वी के लोगों, परमेश्वर के लिये जयजयकार करो;

उसके नाम की महिमा का भजन गाओ; उसकी स्तुति करते हुए, उसकी महिमा करो।

परमेश्वर से कहो, “ तेरे काम कितने भयानक हैं! तेरी महासामर्थ्य के कारण तेरे शत्रु तेरी चापलूसी करेंगे।

सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत् करेंगे, और तेरा भजन गाएँगे; वे तेरे नाम का भजन गाएँगे।” (सेला)

आओ परमेश्वर के कामों को देखो; वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है।

उसने समुद्र को सूखी भूमि कर डाला; वे महानद में से पाँव-पाँव पार उतरे। वहाँ हम उसके कारण आनन्दित हुए,

जो अपने पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करता है, और अपनी आँखों से जाति-जाति को ताकता है। विद्रोही अपने सिर न उठाए। (सेला)

हे देश-देश के लोगों, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ,

जो हमको जीवित रखता है; और हमारे पाँव को टलने नहीं देता।

क्योंकि हे परमेश्वर तूने हमको जाँचा; तूने हमें चाँदी के समान ताया था।

तूने हमको जाल में फँसाया; और हमारी कमर पर भारी बोझ बाँधा था;

तूने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से होकर गए; परन्तु तूने हमको उबार के सुख से भर दिया है।

मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊँगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूँगा,

जो मैंने मुँह खोलकर मानीं, और संकट के समय कही थीं।

मैं तुझे मोटे पशुओं की होमबलि, मेढ़ों की चर्बी की धूप समेत चढ़ाऊँगा; मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊँगा। (सेला)

हे परमेश्वर के सब डरवैयों, आकर सुनो, मैं बताऊँगा कि उसने मेरे लिये क्या-क्या किया है।

मैंने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझसे हुआ।

यदि मैं मन में अनर्थ की बात सोचता, तो प्रभु मेरी न सुनता।

परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।

धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझसे अपनी करुणा दूर कर दी है!

The psalmist testifies that God tried him like silver and brought him through fire and water into a wealthy place, then vows to bring burnt offerings in response. His confidence that God hears the sincere echoes <a href="/bible/irvhin/john/chapter-9/31">John 9:31</a>, and the praise continues into <a href="/bible/irvhin/psalms/chapter-67">Psalms 67</a>.