Psalms 127
A psalm on building, resting, and raising children under God.
Psalm 127 opens with the well-known warning that builders and watchmen labor "in vain" without the LORD's blessing, a truth captured directly in Psalms 127:1. It follows the joyful harvest imagery of Psalms 126 with a matching lesson about dependence on God for daily provision.
यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनानेवालों का परिश्रम व्यर्थ होगा। यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे, तो रखवाले का जागना व्यर्थ ही होगा।
तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और कठोर परिश्रम की रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद प्रदान करता है।
देखो, बच्चे यहोवा के दिए हुए भाग हैं, गर्भ का फल उसकी ओर से प्रतिफल है।
जैसे वीर के हाथ में तीर, वैसे ही जवानी के बच्चे होते हैं।
क्या ही धन्य है वह पुरुष जिसने अपने तरकश को उनसे भर लिया हो! वह फाटक के पास अपने शत्रुओं से बातें करते संकोच न करेगा।