Matthew Chapter 26

Jesus shares the Last Supper with His disciples, then prays in Gethsemane before His arrest.

Matthew 26 opens with the chief priests plotting Jesus' death and a woman anointing His head with precious ointment at Bethany, which He calls preparation 'for my burial.' Judas Iscariot then agrees to betray Him for thirty pieces of silver, turning the joy of Matthew 25's parables toward the coming Passion.


जब यीशु ये सब बातें कह चुका, तो अपने चेलों से कहने लगा।

‹“तुम जानते हो, कि दो दिन के बाद› ‹फसह›‹का पर्व होगा; और मनुष्य का पुत्र क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिये पकड़वाया जाएगा।”›

तब प्रधान याजक और प्रजा के पुरनिए कैफा नामक महायाजक के आँगन में इकट्ठे हुए।

और आपस में विचार करने लगे कि यीशु को छल से पकड़कर मार डालें।

परन्तु वे कहते थे, “पर्व के समय नहीं; कहीं ऐसा न हो कि लोगों में दंगा मच जाए।”

जब यीशु बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर में था।

तो एक स्त्री संगमरमर के पात्र में बहुमूल्य इत्र लेकर उसके पास आई, और जब वह भोजन करने बैठा था, तो उसके सिर पर उण्डेल दिया।

यह देखकर, उसके चेले झुँझला उठे और कहने लगे, “इसका क्यों सत्यानाश किया गया?

यह तो अच्छे दाम पर बेचकर गरीबों को बाँटा जा सकता था।”

यह जानकर यीशु ने उनसे कहा, ‹“स्त्री को क्यों सताते हो? उसने मेरे साथ भलाई की है।›

‹गरीब तुम्हारे साथ सदा रहते हैं, परन्तु मैं तुम्हारे साथ सदैव न रहूँगा।›

‹उसने मेरी देह पर जो यह इत्र उण्डेला है, वह मेरे गाड़े जाने के लिये किया है।›

‹मैं तुम से सच कहता हूँ, कि सारे जगत में जहाँ कहीं यह सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहाँ उसके इस काम का वर्णन भी उसके स्मरण में किया जाएगा।”›

तब यहूदा इस्करियोती ने, जो बारह चेलों में से एक था, प्रधान याजकों के पास जाकर कहा,

“यदि मैं उसे तुम्हारे हाथ पकड़वा दूँ, तो मुझे क्या दोगे?” उन्होंने उसे तीस चाँदी के सिक्के तौलकर दे दिए।

और वह उसी समय से उसे पकड़वाने का अवसर ढूँढ़ने लगा।

अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहाँ चाहता है कि हम तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें?”

उसने कहा, ‹“नगर में फलाने के पास जाकर उससे कहो, कि गुरु कहता है, कि मेरा समय निकट है, मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहाँ फसह मनाऊँगा।”›

अतः चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी, और फसह तैयार किया।

जब साँझ हुई, तो वह बारह चेलों के साथ भोजन करने के लिये बैठा।

जब वे खा रहे थे, तो उसने कहा, ‹“मैं तुम से सच कहता हूँ, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।”›

इस पर वे बहुत उदास हुए, और हर एक उससे पूछने लगा, “हे गुरु, क्या वह मैं हूँ?”

उसने उत्तर दिया, ‹“जिसने मेरे साथ थाली में हाथ डाला है, वही मुझे पकड़वाएगा।›

‹मनुष्य का पुत्र तो जैसा उसके विषय में लिखा है, जाता ही है; परन्तु उस मनुष्य के लिये शोक है जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है: यदि उस मनुष्य का जन्म न होता, तो उसके लिये भला होता।”›

तब उसके पकड़वानेवाले यहूदा ने कहा, “हे रब्बी, क्या वह मैं हूँ?” उसने उससे कहा, ‹“तू कह चुका।”›

जब वे खा रहे थे, तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष माँगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, ‹“लो, खाओ; यह मेरी देह है।”›

फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, ‹“तुम सब इसमें से पीओ,›

‹क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।›

‹मैं तुम से कहता हूँ, कि दाख का यह रस उस दिन तक कभी न पीऊँगा, जब तक तुम्हारे साथ अपने पिता के राज्य में नया न पीऊँ।”›

फिर वे भजन गाकर जैतून पहाड़ पर गए।

तब यीशु ने उनसे कहा, ‹“तुम सब आज ही रात को मेरे विषय में ठोकर खाओगे; क्योंकि लिखा है,› ‹‘मैं चरवाहे को मारूँगा; › ‹और झुण्ड की भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी।’›

‹“परन्तु मैं अपने जी उठने के बाद तुम से पहले गलील को जाऊँगा।”›

इस पर पतरस ने उससे कहा, “यदि सब तेरे विषय में ठोकर खाएँ तो खाएँ, परन्तु मैं कभी भी ठोकर न खाऊँगा।”

यीशु ने उससे कहा, ‹“मैं तुझ से सच कहता हूँ, कि आज ही रात को मुर्गे के बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझसे मुकर जाएगा।”›

पतरस ने उससे कहा, “यदि मुझे तेरे साथ मरना भी हो, तो भी, मैं तुझ से कभी न मुकरूँगा।” और ऐसा ही सब चेलों ने भी कहा।

तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नामक एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा ‹“यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहाँ जाकर प्रार्थना करूँ।”›

और वह पतरस और जब्दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा।

तब उसने उनसे कहा, ‹“मेरा मन बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरा प्राण निकला जा रहा है। तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।”›

फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुँह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, ‹“हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह› ‹कटोरा›‹मुझसे टल जाए, फिर भी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।” ›

फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा, ‹“क्या तुम मेरे साथ एक घण्टे भर न जाग सके?›

‹जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो! आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है।”›

फिर उसने दूसरी बार जाकर यह प्रार्थना की, ‹“हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो।”›

तब उसने आकर उन्हें फिर सोते पाया, क्योंकि उनकी आँखें नींद से भरी थीं।

और उन्हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की।

तब उसने चेलों के पास आकर उनसे कहा, ‹“अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, समय आ पहुँचा है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।›

‹उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वानेवाला निकट आ पहुँचा है।”›

वह यह कह ही रहा था, कि यहूदा जो बारहों में से एक था, आया, और उसके साथ प्रधान याजकों और लोगों के प्राचीनों की ओर से बड़ी भीड़, तलवारें और लाठियाँ लिए हुए आई।

उसके पकड़वानेवाले ने उन्हें यह पता दिया था: “जिसको मैं चूम लूँ वही है; उसे पकड़ लेना।”

और तुरन्त यीशु के पास आकर कहा, “हे रब्बी, नमस्कार!” और उसको बहुत चूमा।

यीशु ने उससे कहा, ‹“हे मित्र, जिस काम के लिये तू आया है, उसे कर ले।”› तब उन्होंने पास आकर यीशु पर हाथ डाले और उसे पकड़ लिया।

तब यीशु के साथियों में से एक ने हाथ बढ़ाकर अपनी तलवार खींच ली और महायाजक के दास पर चलाकर उसका कान काट दिया।

तब यीशु ने उससे कहा, ‹“अपनी तलवार म्यान में रख ले क्योंकि जो तलवार चलाते हैं, वे सब तलवार से नाश किए जाएँगे।›

‹क्या तू नहीं समझता, कि मैं अपने पिता से विनती कर सकता हूँ, और वह स्वर्गदूतों की बारह सैन्य-दल से अधिक मेरे पास अभी उपस्थित कर देगा?›

‹परन्तु पवित्रशास्त्र की वे बातें कि ऐसा ही होना अवश्य है, कैसे पूरी होंगी?”›

उसी समय यीशु ने भीड़ से कहा, ‹“क्या तुम तलवारें और लाठियाँ लेकर मुझे डाकू के समान पकड़ने के लिये निकले हो? मैं हर दिन मन्दिर में बैठकर उपदेश दिया करता था, और तुम ने मुझे नहीं पकड़ा।›

‹परन्तु यह सब इसलिए हुआ है, कि भविष्यद्वक्ताओं के वचन पूरे हों।”› तब सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।

और यीशु के पकड़नेवाले उसको कैफा नामक महायाजक के पास ले गए, जहाँ शास्त्री और पुरनिए इकट्ठे हुए थे।

और पतरस दूर से उसके पीछे-पीछे महायाजक के आँगन तक गया, और भीतर जाकर अन्त देखने को सेवकों के साथ बैठ गया।

प्रधान याजक और सारी महासभा यीशु को मार डालने के लिये उसके विरोध में झूठी गवाही की खोज में थे।

परन्तु बहुत से झूठे गवाहों के आने पर भी न पाई। अन्त में दो जन आए,

और कहा, “इसने कहा कि मैं परमेश्वर के मन्दिर को ढा सकता हूँ और उसे तीन दिन में बना सकता हूँ।”

तब महायाजक ने खड़े होकर उससे कहा, “क्या तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्या गवाही देते हैं?”

परन्तु यीशु चुप रहा। तब महायाजक ने उससे कहा “ मैं तुझे जीविते परमेश्वर की शपथ देता हूँ, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।”

यीशु ने उससे कहा, ‹“तूने आप ही कह दिया; वरन् मैं तुम से यह भी कहता हूँ, कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।”›

तब महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़कर कहा, “इसने परमेश्वर की निन्दा की है, अब हमें गवाहों का क्या प्रयोजन? देखो, तुम ने अभी यह निन्दा सुनी है!

तुम क्या समझते हो?” उन्होंने उत्तर दिया, “यह मृत्युदण्ड के योग्य है।”

तब उन्होंने उसके मुँह पर थूका और उसे घूँसे मारे, दूसरों ने थप्पड़ मार के कहा,

“हे मसीह, हम से भविष्यद्वाणी करके कह कि किसने तुझे मारा?”

पतरस बाहर आँगन में बैठा हुआ था कि एक दासी ने उसके पास आकर कहा, “तू भी यीशु गलीली के साथ था।”

उसने सब के सामने यह कहकर इन्कार किया और कहा, “मैं नहीं जानता तू क्या कह रही है।”

जब वह बाहर द्वार में चला गया, तो दूसरी दासी ने उसे देखकर उनसे जो वहाँ थे कहा, “यह भी तो यीशु नासरी के साथ था।”

उसने शपथ खाकर फिर इन्कार किया, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।”

थोड़ी देर के बाद, जो वहाँ खड़े थे, उन्होंने पतरस के पास आकर उससे कहा, “सचमुच तू भी उनमें से एक है; क्योंकि तेरी बोली तेरा भेद खोल देती है।”

तब वह कोसने और शपथ खाने लगा, “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” और तुरन्त मुर्गे ने बाँग दी।

तब पतरस को यीशु की कही हुई बात स्मरण आई, ‹“मुर्गे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा।”› और वह बाहर जाकर फूट फूटकर रोने लगा।

At the Passover meal Jesus institutes the bread and cup as His body and blood, warns Peter he will deny Him three times, and prays in Gethsemane that 'this cup' might pass, though 'not as I will, but as thou wilt.' His prediction that the sheep would be 'scattered abroad' echoes <a href="/bible/irvhin/zechariah/chapter-13/7">Zechariah 13:7</a>, and the arrest scene continues into <a href="/bible/irvhin/matthew/chapter-27">Matthew 27</a>.