Matthew Chapter 20

A parable of vineyard workers illustrates grace, as Jesus again foretells His death.

Matthew 20 opens with the parable of the laborers in the vineyard, where workers hired at the eleventh hour receive the same wage as those who toiled all day, prompting the householder to ask, 'Is thine eye evil, because I am good?' This teaching on grace follows the encounter with the rich young man in Matthew 19.


‹“स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सवेरे निकला, कि अपनी दाख की बारी में मजदूरों को लगाए।›

‹और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा।›

‹फिर पहर›‹एक दिन चढ़े, निकलकर, अन्य लोगों को बाजार में बेकार खड़े देखा,›

‹और उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूँगा।’ तब वे भी गए।›

‹फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया।›

‹और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर दूसरों को खड़े पाया, और उनसे कहा ‘तुम क्यों यहाँ दिन भर बेकार खड़े रहे?’ उन्होंने उससे कहा, ‘इसलिए, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया।’ ›

‹उसने उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ।’›

‹“साँझ को दाख की बारी के स्वामी ने अपने भण्डारी से कहा, ‘मजदूरों को बुलाकर पिछले से लेकर पहले तक उन्हें मजदूरी दे दे।’›

‹जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक-एक दीनार मिला।›

‹जो पहले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला।›

‹जब मिला, तो वह गृह स्वामी पर कुड़कुड़ा के कहने लगे,›

‹‘इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तूने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्होंने दिन भर का भार उठाया और धूप सही?’›

‹उसने उनमें से एक को उत्तर दिया, ‘हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तूने मुझसे एक दीनार न ठहराया?›

‹जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूँ।›

‹क्या यह उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूँ वैसा करूँ? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है?’›

‹इस प्रकार› ‹जो अन्तिम हैं, वे प्रथम हो जाएँगे›‹और जो प्रथम हैं वे अन्तिम हो जाएँगे।”›

यीशु यरूशलेम को जाते हुए बारह चेलों को एकान्त में ले गया, और मार्ग में उनसे कहने लगा।

‹“देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं; और मनुष्य का पुत्र प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा और वे उसको घात के योग्य ठहराएँगे।›

‹और उसको अन्यजातियों के हाथ सौंपेंगे, कि वे उसे उपहास में उड़ाएँ, और कोड़े मारें, और क्रूस पर चढ़ाएँ, और वह तीसरे दिन जिलाया जाएगा।”›

तब जब्दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उससे कुछ माँगने लगी।

उसने उससे कहा, ‹“तू क्या चाहती है?”› वह उससे बोली, “यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएँ बैठे।”

यीशु ने उत्तर दिया, “तुम नहीं जानते कि क्या माँगते हो। जो कटोरा मैं पीने पर हूँ, क्या तुम पी सकते हो?” उन्होंने उससे कहा, “पी सकते हैं।”

उसने उनसे कहा, ‹“तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएँ किसी को बैठाना मेरा काम नहीं, पर जिनके लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।”›

यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।

यीशु ने उन्हें पास बुलाकर कहा, ‹“तुम जानते हो, कि अन्यजातियों के अधिपति उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।›

‹परन्तु तुम में ऐसा न होगा; परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने;›

‹और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने;›

‹जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिए नहीं आया कि अपनी सेवा करवाए, परन्तु इसलिए आया कि सेवा करे और बहुतों के छुटकारे के लिये अपने प्राण दे।”›

जब वे यरीहो से निकल रहे थे, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली।

और दो अंधे, जो सड़क के किनारे बैठे थे, यह सुनकर कि यीशु जा रहा है, पुकारकर कहने लगे, “हे प्रभु, दाऊद की सन्तान, हम पर दया कर।”

लोगों ने उन्हें डाँटा, कि चुप रहें, पर वे और भी चिल्लाकर बोले, “हे प्रभु, दाऊद की सन्तान, हम पर दया कर।”

तब यीशु ने खड़े होकर, उन्हें बुलाया, और कहा, ‹“तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूँ?”›

उन्होंने उससे कहा, “हे प्रभु, यह कि हमारी आँखें खुल जाएँ।”

यीशु ने तरस खाकर उनकी आँखें छूई, और वे तुरन्त देखने लगे; और उसके पीछे हो लिए।

Jesus tells His disciples plainly that He will be betrayed, mocked, and crucified, then rise on the third day, explaining that He 'came not to be ministered unto, but to minister, and to give his life a ransom for many,' a phrase echoed in <a href="/bible/irvhin/hebrews/chapter-9/28">Hebrews 9:28</a>. The chapter ends near Jericho as two blind men call out to Him and receive their sight.