John 21 – Jesus Restores Peter

The risen Jesus shares breakfast by the sea and restores Peter with a threefold charge.

In John 21, the risen Jesus appears a third time to his disciples by the Sea of Tiberias, following the earlier resurrection appearances of John 20, directing their empty nets to a catch of a hundred and fifty-three fish.


इन बातों के बाद यीशु ने अपने आपको तिबिरियास झील के किनारे चेलों पर प्रगट किया और इस रीति से प्रगट किया।

शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, और गलील के काना नगर का नतनएल और जब्दी के पुत्र, और उसके चेलों में से दो और जन इकट्ठे थे।

शमौन पतरस ने उनसे कहा, “मैं मछली पकड़ने जाता हूँ।” उन्होंने उससे कहा, “हम भी तेरे साथ चलते हैं।” इसलिए वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात कुछ न पकड़ा।

भोर होते ही यीशु किनारे पर खड़ा हुआ; फिर भी चेलों ने न पहचाना कि यह यीशु है।

तब यीशु ने उनसे कहा, ‹“हे बालकों, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को है?”› उन्होंने उत्तर दिया, “नहीं।”

उसने उनसे कहा, ‹“नाव की दाहिनी ओर जाल डालो, तो पाओगे।”› तब उन्होंने जाल डाला, और अब मछलियों की बहुतायत के कारण उसे खींच न सके।

इसलिए उस चेले ने जिससे यीशु प्रेम रखता था पतरस से कहा, “ यह तो प्रभु है।” शमौन पतरस ने यह सुनकर कि प्रभु है, कमर में अंगरखा कस लिया, क्योंकि वह नंगा था, और झील में कूद पड़ा।

परन्तु और चेले डोंगी पर मछलियों से भरा हुआ जाल खींचते हुए आए, क्योंकि वे किनारे से अधिक दूर नहीं, कोई दो सौ हाथ पर थे।

जब किनारे पर उतरे, तो उन्होंने कोयले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी।

यीशु ने उनसे कहा, ‹“जो मछलियाँ तुम ने अभी पकड़ी हैं, उनमें से कुछ लाओ।”›

शमौन पतरस ने डोंगी पर चढ़कर एक सौ तिरपन बड़ी मछलियों से भरा हुआ जाल किनारे पर खींचा, और इतनी मछलियाँ होने पर भी जाल न फटा।

यीशु ने उनसे कहा, ‹“आओ, भोजन करो।”› और चेलों में से किसी को साहस न हुआ, कि उससे पूछे, “तू कौन है?” क्योंकि वे जानते थे कि यह प्रभु है।

यीशु आया, और रोटी लेकर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी।

यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए।

भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, ‹“हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इनसे बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है?”› उसने उससे कहा, “हाँ प्रभु; तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, ‹“मेरे मेम्नों को चरा।”›

उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, ‹“हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है?”› उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, ‹“› ‹मेरी भेड़ों›‹की रखवाली कर।”›

उसने तीसरी बार उससे कहा, ‹“हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?”› पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा, “क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?” और उससे कहा, “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” यीशु ने उससे कहा, ‹“मेरी भेड़ों को चरा।›

‹मैं तुझ से सच-सच कहता हूँ, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बाँधकर जहाँ चाहता था, वहाँ फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बाँधकर जहाँ तू न चाहेगा वहाँ तुझे ले जाएगा।”›

उसने इन बातों से दर्शाया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उससे कहा, ‹“मेरे पीछे हो ले।”›

पतरस ने फिरकर उस चेले को पीछे आते देखा, जिससे यीशु प्रेम रखता था, और जिसने भोजन के समय उसकी छाती की ओर झुककर पूछा “हे प्रभु, तेरा पकड़वानेवाला कौन है?”

उसे देखकर पतरस ने यीशु से कहा, “हे प्रभु, इसका क्या हाल होगा?”

यीशु ने उससे कहा, ‹“यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या? तू मेरे पीछे हो ले।”›

इसलिए भाइयों में यह बात फैल गई, कि वह चेला न मरेगा; तो भी यीशु ने उससे यह नहीं कहा, कि वह न मरेगा, परन्तु यह कि ‹“यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इससे क्या?”›

यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है और जिसने इन बातों को लिखा है और हम जानते हैं, कि उसकी गवाही सच्ची है।

और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक-एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ, कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं।

Over breakfast on the shore, Jesus asks Peter three times, 'lovest thou me,' restoring him with the charge to 'feed my sheep' (<a href="/bible/irvhin/john/chapter-21/17">John 21:17</a>) after his earlier denials, a restoration that echoes the trust described in <a href="/bible/irvhin/psalms/chapter-40/5">Psalms 40:5</a>.