Ezekiel 15 – The Parable of the Vine Wood

A short, sharp parable: Jerusalem is vine wood, fit only for the fire.

Ezekiel 15: The Useless Vine

Ezekiel 15 is one of Ezekiel's shortest chapters, a compact parable following the elders' judgment in Ezekiel 14: vine wood is useless for building, good only for burning.


फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा,

“हे मनुष्य के सन्तान, सब वृक्षों में अंगूर की लता की क्या श्रेष्ठता है? अंगूर की शाखा जो जंगल के पेड़ों के बीच उत्पन्न होती है, उसमें क्या गुण है?

क्या कोई वस्तु बनाने के लिये उसमें से लकड़ी ली जाती, या कोई बर्तन टाँगने के लिये उसमें से खूँटी बन सकती है?

वह तो ईंधन बनाकर आग में झोंकी जाती है; उसके दोनों सिरे आग से जल जाते, और उसके बीच का भाग भस्म हो जाता है, क्या वह किसी भी काम की है?

देख, जब वह बनी थी, तब भी वह किसी काम की न थी, फिर जब वह आग का ईंधन होकर भस्म हो गई है, तब किस काम की हो सकती है?

इसलिए प्रभु यहोवा यह कहता है, जैसे जंगल के पेड़ों में से मैं अंगूर की लता को आग का ईंधन कर देता हूँ, वैसे ही मैं यरूशलेम के निवासियों को नाश कर दूँगा।

मैं उनके विरुद्ध होऊँगा, और वे एक आग में से निकलकर फिर दूसरी आग का ईंधन हो जाएँगे; और जब मैं उनसे विमुख होऊँगा, तब तुम लोग जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ।

मैं उनका देश उजाड़ दूँगा, क्योंकि उन्होंने मुझसे विश्वासघात किया है, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।”

Jerusalem, the LORD says, is exactly that vine wood, already charred at both ends and now given wholly to the fire (v6), the same fate pronounced against her people in <a href="/bible/irvhin/ezekiel/chapter-14/8">Ezekiel 14:8</a>. A far longer allegory of unfaithful Jerusalem follows in <a href="/bible/irvhin/ezekiel/chapter-16">Ezekiel 16</a>.